इस साइंटिस्ट टीचर का जीवन है मिसाल, कभी
सुसाइड का बना लिया था मन
(फोटो
:
स्टीफन
हॉकिंग)
एजुकेशन
भास्कर। टीचर्स
डे के मौके पर हम दुनिया के
एक ऐसे भौतिकशास्त्री और टीचर
के बारे में बता रहे हैं जिनका
पूरा का पूरा जीवन ही उनके काम
की वजह से ज़िंदा मिसाल बन गया
है। हालांकि, इस
महान टीचर के जीवन में एक ऐसा
क्षण भी आया था जब इन्होंने
सुसाइड करने का मन बना लिया
था। जी हां, यहां
बात 72 वर्षीय स्टीफन
हॉकिंग की हो रही है। हॉकिंग
को दुनिया 'ब्लैक
होल' पर उनके कार्य
और साइंस की कई पॉपुलर रिसर्च
बुक्स के लेखन के लिए जानती
है।
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: 21 साल की उम्र
में लाइलाज बीमारी ने बनाया
मरीज
शिक्षक
के रूप में हॉकिंग : हॉकिंग
ने कैम्ब्रिज इंग्लैंड के
गॉनविले एंड सियस कॉलेज और
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में
एक शिक्षक के रूप में अध्यापन
कार्य किया। हॉकिंग ने 'ब्लैक
होल' और 'बिग
बैंग थ्योरी' को
समझने में अहम योगदान दिया
है। उनके पास 12 मानद
डिग्रियां हैं और अमरीका का
सबसे उच्च नागरिक सम्मान भी
उन्हें दिया गया है।
21 साल
की उम्र में लाइलाज बीमारी
ने बनाया मरीज
स्टीफन
विलियम हॉकिंग का जन्म 8
जनवरी 1942 को
ऑक्सफ़ोर्ड, इग्लैंड
में हुआ था। हॉकिंग का बचपन
साइंस के माहौल में बीता।
गौरतलब है कि हॉकिंग के माता-पिता
ऑक्सफ़ोर्ड से साइंस ग्रैजुएट
थे। यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज
में पढ़ने के दौरान साइंस के
इस होनहार छात्र को मात्र 21
साल की उम्र में
एम्योट्रोपिक लेटरल स्केलेरॉसिस
(एएलएस) नाम
की बीमारी ने जकड़ लिया।
वर्तमान
में हॉकिंग मशीनों और कम्प्यूटर
के सहारे दुनिया से बातचीत
कर पाते हैं। बता दें कि हॉकिंग
के शरीर का समूचा न्यूरॉन
सिस्टम डिस्टर्ब है। इस वजह
से उनकी अधिकांश मांसपेशियां
काम नहीं करतीं,
वे सिर्फ
अपने गले की मांसपेशी और
कम्प्यूटर के सहारे लोगों से
कम्युनिकेट कर पाते हैं।
उल्लेखनीय है कि 1980
में अपनी
इस न्यूरोलॉजिकल डिजिज से
परेशान होकर इस भौतिकशास्त्री
ने आत्महत्या तक का विचार कर
लिया था। दुनिया के लिए गर्व
की बात है कि फिलहाल यह एमिनेंट
साइंटिस्ट नर्सिंग केयर और
मशीनों के कारण हमारे बीच में
है।
70
के दशक में
खराब स्वास्थ्य के बावजूद
हॉकिंग भौतिकी के क्षेत्र
में अनुसंधान करते रहे हैं।
1974 में
हॉकिंग की एक खोज ने उन्हें
साइंस सेलिब्रिटी बना दिया।
1988 में
हॉकिंग को एक उल्लेखनीय कार्य
के प्रकाशन ने साइंस के कई
अनसुलझे सवालों का जवाब दिया।
इस कार्य के लिए हॉकिंग को
ब्रिटिश एम्पायर ने प्रतिष्ठित
'कमांडर
ऑफ द ऑर्डर'
के पुरस्कार
से सम्मानित किया। गौरतलब है
कि हॉकिंग द्वारा वर्षों के
रिसर्च का परिणाम 'ए
ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम'
के प्रकाशन
ने साइंस के कई बंद दरवाजे
खोले। उनके इस प्रकाशन की
लोकप्रियता का अंदाजा इस बात
से भी लगाया जा सकता है कि यह
महत्वपूर्ण प्रकाशन,
लंदन संडे
टाइम्स की लिस्ट में चार साल
तक बेस्ट सेलिंग थी। इसकी 25
लाख कॉपियां
बिकी और करीब 40
भाषाओं में
अनुवाद भी हुआ। अपने आप में
यह एक अनोखा रिकॉर्ड माना जाता
है। हॉकिंग ऐसे भौतिकशास्त्री
और साइंटिस्ट हैं जिन्हें
मात्र 32
वर्ष की
उम्र में रॉयल सोसाइटी के फेलो
के लिए नामित किया गया। 1775
में प्रतिष्ठित
अलबर्ट आइंस्टीन अवॉर्ड मिला।
हॉकिंग को दुनियाभर में कई
प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके
हैं।
कंटेंट
सोर्स : biography.com
taken from www.bhaskar.com






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